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mahabharat 2.82.d28: अर्जुन ने अपने तीखे बाणों से देवताओं द्वारा छोड़े गए उन अस्त्रों को आकाश में ही दो-तीन टुकड़ों में तोड़ डाला।   |   mahabharat अध्याय 2.82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक d28
 
 
श्लोक  2.82.d28 
तान् पार्थ: शस्त्रवर्षान् वै विसृष्टान् विबुधैस्तदा।
द्विधा त्रिधा च चिच्छेद ख एव निशितै: शरै:॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने अपने तीखे बाणों से देवताओं द्वारा छोड़े गए उन अस्त्रों को आकाश में ही दो-तीन टुकड़ों में तोड़ डाला।
 
With his sharp arrows, Arjuna broke those weapons released by the gods into two and three pieces in the sky itself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)