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mahabharat 2.82.d26-d27: पिताश्री! यह देखकर समस्त महाबली देवता पुनः क्रोधित हो गये और उस युद्ध में वे मरणासन्न अर्जुन पर नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 2.82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक d26-d27
 
 
श्लोक  2.82.d26-d27 
पुन: क्रुद्धा: सुरा: सर्वे मर्त्यं संख्ये महाबला:॥
नानाशस्त्रैर्ववर्षुस्तं सव्यसाचिं महीपते॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! यह देखकर समस्त महाबली देवता पुनः क्रोधित हो गये और उस युद्ध में वे मरणासन्न अर्जुन पर नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा करने लगे।
 
father! Seeing this, all the Mahabali gods became angry again and in that war, they started showering various types of weapons on the mortal Arjuna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)