श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक d25
 
 
श्लोक  2.82.d25 
तत: पार्थो महातेजा गाण्डीवं गृह्य सत्वर:॥
वारयामास देवानां शरव्रातै: शरांस्तदा।
 
 
अनुवाद
परन्तु महाबली पार्थ ने तुरन्त ही गाण्डीव धनुष उठा लिया और अपने बाणों की वर्षा से देवताओं के बाणों को रोक दिया।
 
But the mighty Partha quickly took up the Gandiva bow and stopped the arrows of the gods with a shower of his arrows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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