श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक d22-d23
 
 
श्लोक  2.82.d22-d23 
ततो देवगणा: सर्वे पार्थं समभिदुद्रुवु:।
असम्भ्रान्तस्तु तान् दृष्ट्वा स तां देवमयीं चमूम्।
त्वरित: फाल्गुनो गृह्य तीक्ष्णांस्तानाशुगांस्तदा॥
शक्रं देवांश्च सम्प्रेक्ष्य तस्थौ काल इवात्यये॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् समस्त देवताओं ने एक साथ मिलकर अर्जुन पर आक्रमण किया; किन्तु अर्जुन देवताओं की सेना को देखकर भयभीत नहीं हुआ, वरन् वह हाथ में तीखे बाण लिए हुए, प्रलयकाल के प्रलयंकारी काल के समान अविचल खड़ा हो गया।
 
Thereafter all the gods attacked Arjuna together; but Arjuna did not panic on seeing the army of gods. He immediately stood motionless like the all-destroying time during the time of deluge, looking at Indra and the gods with sharp arrows in his hand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)