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mahabharat 2.82.d20: हे भरतश्रेष्ठ! कुन्तीपुत्र अर्जुन के साथ बार-बार युद्ध करने पर जब देवताओं को यह ज्ञात हो गया कि अब उसे रणभूमि में पराजित करना असम्भव है, तब अर्जुन के बाणों से अत्यन्त आहत होकर वे युद्ध करना छोड़कर भाग गये।   |   mahabharat अध्याय 2.82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक d20
 
 
श्लोक  2.82.d20 
ततो देवगणा: सर्वे युद्‍ध्वा पार्थेन वै मुहु:।
रणे जेतुमशक्यं तं ज्ञात्वा ते भरतर्षभ॥
शान्तास्ते विबुधा: सर्वे पार्थबाणाभिपीडिता:।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! कुन्तीपुत्र अर्जुन के साथ बार-बार युद्ध करने पर जब देवताओं को यह ज्ञात हो गया कि अब उसे रणभूमि में पराजित करना असम्भव है, तब अर्जुन के बाणों से अत्यन्त आहत होकर वे युद्ध करना छोड़कर भाग गये।
 
O best of the Bharatas! After fighting repeatedly with Kunti's son Arjuna, when the gods realized that it was impossible to defeat him in the battlefield, they stopped fighting (ran away) due to being extremely hurt by Arjuna's arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)