श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.82.8 
सर्वोपायैर्निहन्तव्या: शत्रव: शत्रुसूदन।
पुरा युद्धाद् बलाद् वापि प्रकुर्वन्ति तवाहितम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुसूदन! जो शत्रु आपको हानि पहुँचाते हैं, उन्हें बिना युद्ध किए अथवा युद्ध करके ही मार डालना चाहिए।॥8॥
 
O Shatrusudan! Those enemies who harm you should be killed by all means, either without a fight or by fighting. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)