vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति
»
श्लोक 8
श्लोक
2.82.8
सर्वोपायैर्निहन्तव्या: शत्रव: शत्रुसूदन।
पुरा युद्धाद् बलाद् वापि प्रकुर्वन्ति तवाहितम्॥ ८॥
अनुवाद
हे शत्रुसूदन! जो शत्रु आपको हानि पहुँचाते हैं, उन्हें बिना युद्ध किए अथवा युद्ध करके ही मार डालना चाहिए।॥8॥
O Shatrusudan! Those enemies who harm you should be killed by all means, either without a fight or by fighting. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×