श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.82.4 
दु:शासन उवाच
दु:खेनैतत् समानीतं स्थविरो नाशयत्यसौ।
शत्रुसाद् गमयद् द्रव्यं तद् बुध्यध्वं महारथा:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
दु:शासन बोला - हे वीरों! तुम्हें मालूम ही होगा कि हमने जो धन बड़े कष्टों से अर्जित किया था, उसे हमारे वृद्ध पिता नष्ट कर रहे हैं। उन्होंने सारा धन शत्रुओं को सौंप दिया है।
 
Dushasan said - O warriors! You must know that the wealth which we had acquired after a lot of hardships is being destroyed by our old father. He has handed over all the wealth to the enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)