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mahabharat 2.82.27: जो मित्र भविष्य का अर्थ देख और समझ सकते थे, वे अपनी अनिच्छा प्रकट करते रहे; परंतु दुर्योधन आदि पुत्रों के प्रति प्रेम से द्रवित होकर धृतराष्ट्र ने पाण्डवों को बुलाने का आदेश दिया॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 2.82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.82.27 
अकामानां च सर्वेषां सुहृदामर्थदर्शिनाम्।
अकरोत् पाण्डवाह्वानं धृतराष्ट्र: सुतप्रिय:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जो मित्र भविष्य का अर्थ देख और समझ सकते थे, वे अपनी अनिच्छा प्रकट करते रहे; परंतु दुर्योधन आदि पुत्रों के प्रति प्रेम से द्रवित होकर धृतराष्ट्र ने पाण्डवों को बुलाने का आदेश दिया॥ 27॥
 
The friends who could see and understand the future meaning kept expressing their unwillingness; but Dhritarashtra, moved by the love for the sons of Duryodhan etc., ordered the Pandavas to be called.॥ 27॥
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि अनुद्यूतपर्वणि युधिष्ठिरप्रत्यानयने चतु:सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत अनुद्यूतपर्वमें युधिष्ठिरप्रत्यानयनविषयक चौहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७४॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठके ६७ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ९४ १/२ श्लोक हैं।]
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)