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mahabharat 2.82.24: धृतराष्ट्र बोले, "पुत्र! यदि पाण्डव बहुत दूर चले गए हों, तो भी यदि तुम चाहो तो उन्हें तुरन्त बुला सकते हो। सभी पाण्डव यहाँ आकर इस नये दांव पर पुनः जुआ खेलें।"   |   mahabharat अध्याय 2.82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.82.24 
धृतराष्ट्र उवाच
तूर्णं प्रत्यानयस्वैतान् कामं व्यध्वगतानपि।
आगच्छन्तु पुनर्द्यूतमिदं कुर्वन्तु पाण्डवा:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, "पुत्र! यदि पाण्डव बहुत दूर चले गए हों, तो भी यदि तुम चाहो तो उन्हें तुरन्त बुला सकते हो। सभी पाण्डव यहाँ आकर इस नये दांव पर पुनः जुआ खेलें।"
 
Dhritarashtra said, "Son! Even if the Pandavas have gone far away, if you wish, you can call them immediately. All the Pandavas should come here and play gambling again on this new set of stakes." 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)