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mahabharat 2.82.23: यदि वे तेरहवें वर्ष वनवास में रहने की अपनी प्रतिज्ञा पूरी करें, तो हम उन्हें युद्ध में पराजित कर देंगे। हे शत्रुओं को कष्ट देने वाले राजा! कृपया हमारा प्रस्ताव स्वीकार करें।   |   mahabharat अध्याय 2.82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.82.23 
ते च त्रयोदशं वर्षं पारयिष्यन्ति चेद् व्रतम्।
जेष्यामस्तान् वयं राजन् रोचतां ते परंतप॥ २३॥
 
 
अनुवाद
यदि वे तेरहवें वर्ष वनवास में रहने की अपनी प्रतिज्ञा पूरी करें, तो हम उन्हें युद्ध में पराजित कर देंगे। हे शत्रुओं को कष्ट देने वाले राजा! कृपया हमारा प्रस्ताव स्वीकार करें।
 
If they fulfill their vow of living in exile for the thirteenth year, we will defeat them in battle. O King who torments his enemies! Please accept our proposal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)