श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.82.21 
एतत् कृत्यतमं राजन्नस्माकं भरतर्षभ।
अयं हि शकुनिर्वेद सविद्यामक्षसम्पदम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भरतकुलभूषण महाराज! यही हमारा सबसे बड़ा कार्य है। यह मामा शकुनि ज्ञान के साथ-साथ पासे फेंकने की कला भी अच्छी तरह जानता है॥ 21॥
 
Bharatkulbhushan Maharaj! This is our greatest task. This uncle Shakuni knows the art of throwing dice along with knowledge very well. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)