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mahabharat 2.82.16: हमने उनका अपमान किया है, इसलिए वे हमें इसके लिए कभी क्षमा नहीं करेंगे। उनमें से कौन द्रौपदी पर हुए कष्ट को चुपचाप सह लेगा?॥16॥   |   mahabharat अध्याय 2.82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 82: दुर्योधनका धृतराष्ट्रसे अर्जुनकी वीरता बतलाकर पुन: द्यूतक्रीड़ाके लिये पाण्डवोंको बुलानेका अनुरोध और उनकी स्वीकृति  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.82.16 
न क्षंस्यन्ते तथास्माभिर्जातु विप्रकृता हि ते।
द्रौपद्याश्च परिक्लेशं कस्तेषां क्षन्तुमर्हति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हमने उनका अपमान किया है, इसलिए वे हमें इसके लिए कभी क्षमा नहीं करेंगे। उनमें से कौन द्रौपदी पर हुए कष्ट को चुपचाप सह लेगा?॥16॥
 
We have insulted them, so they will never forgive us for this. Who among them will quietly endure the suffering inflicted on Draupadi?॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)