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mahabharat 2.81.6-7: जो लोग शत्रुता को स्मरण नहीं करते, केवल गुणों को देखते हैं, अवगुणों को नहीं और किसी से भी वैर नहीं करते, वे श्रेष्ठ पुरुष कहलाते हैं। पुण्यात्मा पुरुष दूसरों के केवल अच्छे कर्मों (उपकार आदि) को ही स्मरण रखते हैं, उनके द्वारा किए गए वैर को नहीं। वे दूसरों का उपकार करते हैं; परंतु उनसे बदला लेने की भावना नहीं रखते। ॥6-7॥   |   mahabharat अध्याय 2.81: धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको सारा धन लौटाकर एवं समझा-बुझाकर इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 81: धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको सारा धन लौटाकर एवं समझा-बुझाकर इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश देना  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  2.81.6-7 
न वैराण्यभिजानन्ति गुणान् पश्यन्ति नागुणान्।
विरोधं नाधिगच्छन्ति ये त उत्तमपूरुषा:॥ ६॥
स्मरन्ति सुकृतान्येव न वैराणि कृतान्यपि।
सन्त: परार्थं कुर्वाणा नावेक्षन्ते प्रतिक्रियाम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जो लोग शत्रुता को स्मरण नहीं करते, केवल गुणों को देखते हैं, अवगुणों को नहीं और किसी से भी वैर नहीं करते, वे श्रेष्ठ पुरुष कहलाते हैं। पुण्यात्मा पुरुष दूसरों के केवल अच्छे कर्मों (उपकार आदि) को ही स्मरण रखते हैं, उनके द्वारा किए गए वैर को नहीं। वे दूसरों का उपकार करते हैं; परंतु उनसे बदला लेने की भावना नहीं रखते। ॥6-7॥
 
Those who do not remember enmity, see only the virtues, not the demerits and do not have enmity with anyone, are called the best men. The virtuous men remember only the good deeds of others (favors etc.) and not the enmity shown by them. They do good to others; but do not have the feeling of taking revenge from them. ॥ 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)