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mahabharat 2.81.5: जहाँ ज्ञान है, वहाँ शांति है। भारत! तुम शांत हो जाओ। (जो कुछ हुआ उसे भूल जाओ।) कुल्हाड़ी पत्थर या लोहे पर नहीं चलती। लोग इसका प्रयोग केवल लकड़ी पर ही करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 2.81: धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको सारा धन लौटाकर एवं समझा-बुझाकर इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 81: धृतराष्ट्रका युधिष्ठिरको सारा धन लौटाकर एवं समझा-बुझाकर इन्द्रप्रस्थ जानेका आदेश देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.81.5 
यतो बुद्धिस्तत: शान्ति: प्रशमं गच्छ भारत।
नादारुणि पतेच्छस्त्रं दारुण्येतन्निपात्यते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जहाँ ज्ञान है, वहाँ शांति है। भारत! तुम शांत हो जाओ। (जो कुछ हुआ उसे भूल जाओ।) कुल्हाड़ी पत्थर या लोहे पर नहीं चलती। लोग इसका प्रयोग केवल लकड़ी पर ही करते हैं।
 
Where there is wisdom, there is peace. Bharat! You calm down. (Forget whatever has happened.) An axe does not work on stone or iron. People use it only on wood. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)