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mahabharat 2.80.9: बदला लेने का उपाय जानते हुए भी, पुण्यात्मा पुरुष दूसरों के उपकारों को ही याद रखते हैं, उनके द्वारा किए गए शत्रुता को नहीं। ऐसे पुण्यात्मा पुरुष स्वयं भी सभी से सम्मान प्राप्त करते रहते हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 2.80: शत्रुओंको मारनेके लिये उद्यत हुए भीमको युधिष्ठिरका शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 80: शत्रुओंको मारनेके लिये उद्यत हुए भीमको युधिष्ठिरका शान्त करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.80.9 
स्मरन्ति सुकृतान्येव न वैराणि कृतान्यपि।
सन्त: प्रतिविजानन्तो लब्धसम्भावना: स्वयम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
बदला लेने का उपाय जानते हुए भी, पुण्यात्मा पुरुष दूसरों के उपकारों को ही याद रखते हैं, उनके द्वारा किए गए शत्रुता को नहीं। ऐसे पुण्यात्मा पुरुष स्वयं भी सभी से सम्मान प्राप्त करते रहते हैं॥9॥
 
Even after knowing the means of revenge, virtuous men remember only the favors of others, not the enmity shown by them. Such virtuous men themselves continue to receive respect from everyone.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)