श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 80: शत्रुओंको मारनेके लिये उद्यत हुए भीमको युधिष्ठिरका शान्त करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.80.6 
अमेध्ये वै गतप्राणे शून्ये ज्ञातिभिरुज्झिते।
देहे त्रितयमेवैतत् पुरुषस्योपयुज्यते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जब यह शरीर प्राणहीन और अशुद्ध हो जाता है और सभी सम्बन्धी इसे त्याग देते हैं, तब ये ज्ञान आदि तीन ज्योतियाँ ही उस (परलोक गए हुए) व्यक्ति के काम आती हैं। ॥6॥
 
When this body becomes lifeless and impure and all the relatives abandon it, then only these three lights like knowledge etc. are of use to the person (who has gone to the other world). ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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