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श्लोक 2.80.5  |
भीम उवाच
त्रीणि ज्योतींषि पुरुष इति वै देवलोऽब्रवीत्।
अपत्यं कर्म विद्या च यत: सृष्टा: प्रजास्तत:॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| भीमसेन बोले - महर्षि देवल कहते हैं कि मनुष्य में तीन प्रकार के तेज हैं - संतति, कर्म और ज्ञान; क्योंकि इन्हीं से सम्पूर्ण प्राणियों की उत्पत्ति हुई है॥5॥ |
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| Bhimsena said - Maharishi Devala says that there are three kinds of lights in a man - progeny, karma and knowledge; because from these all the creatures were created.॥ 5॥ |
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