श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 80: शत्रुओंको मारनेके लिये उद्यत हुए भीमको युधिष्ठिरका शान्त करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.80.5 
भीम उवाच
त्रीणि ज्योतींषि पुरुष इति वै देवलोऽब्रवीत्।
अपत्यं कर्म विद्या च यत: सृष्टा: प्रजास्तत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले - महर्षि देवल कहते हैं कि मनुष्य में तीन प्रकार के तेज हैं - संतति, कर्म और ज्ञान; क्योंकि इन्हीं से सम्पूर्ण प्राणियों की उत्पत्ति हुई है॥5॥
 
Bhimsena said - Maharishi Devala says that there are three kinds of lights in a man - progeny, karma and knowledge; because from these all the creatures were created.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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