श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 80: शत्रुओंको मारनेके लिये उद्यत हुए भीमको युधिष्ठिरका शान्त करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.80.17 
निवार्य च महाबाहुं कोपसंरक्तलोचनम्।
पितरं समुपातिष्ठद् धृतराष्ट्रं कृताञ्जलि:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उस समय बलवान भीम की आँखें क्रोध से लाल हो रही थीं। उन्हें रोककर राजा युधिष्ठिर हाथ जोड़कर अपने चाचा महाराज धृतराष्ट्र के पास गए।
 
At that time the eyes of the powerful Bhima were turning red with anger. Stopping him, King Yudhishthira went to his uncle Maharaja Dhritarashtra with folded hands.
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि द्यूतपर्वणि भीमक्रोधे द्विसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत द्यूतपर्वमें भीमसेनका क्रोधविषयक बहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७२॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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