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mahabharat 2.80.1: कर्ण ने कहा - मैंने मनुष्यों में जितनी भी सुन्दर स्त्रियों के विषय में सुना है, उनमें से किसी ने भी ऐसा अद्भुत कार्य किया हो, ऐसा मैंने कभी नहीं सुना।   |   mahabharat अध्याय 2.80: शत्रुओंको मारनेके लिये उद्यत हुए भीमको युधिष्ठिरका शान्त करना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 80: शत्रुओंको मारनेके लिये उद्यत हुए भीमको युधिष्ठिरका शान्त करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.80.1 
कर्ण उवाच
या न: श्रुता मनुष्येषु स्त्रियो रूपेण सम्मता:।
तासामेतादृशं कर्म न कस्याश्चन शुश्रुम॥ १॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने कहा - मैंने मनुष्यों में जितनी भी सुन्दर स्त्रियों के विषय में सुना है, उनमें से किसी ने भी ऐसा अद्भुत कार्य किया हो, ऐसा मैंने कभी नहीं सुना।
 
Karna said - I have never heard of any of the beautiful women I have heard of among humans having done such a wonderful deed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)