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mahabharat 2.8.7-8h: वहाँ सदैव स्वादिष्ट गर्म और ठंडा जल उपलब्ध रहता है। हे प्रिय! अनेक धर्मात्मा राजा और शुद्ध हृदय वाले ब्रह्मर्षि वहाँ सुखपूर्वक बैठकर सूर्यपुत्र यमराज की पूजा करते हैं। 7 1/2   |   mahabharat अध्याय 2.8: यमराजकी सभाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 8: यमराजकी सभाका वर्णन  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  2.8.7-8h 
रसवन्ति च तोयानि शीतान्युष्णानि चैव हि।
तस्यां राजर्षय: पुण्यास्तथा ब्रह्मर्षयोऽमला:॥ ७॥
यमं वैवस्वतं तात प्रहृष्टा: पर्युपासते।
 
 
अनुवाद
वहाँ सदैव स्वादिष्ट गर्म और ठंडा जल उपलब्ध रहता है। हे प्रिय! अनेक धर्मात्मा राजा और शुद्ध हृदय वाले ब्रह्मर्षि वहाँ सुखपूर्वक बैठकर सूर्यपुत्र यमराज की पूजा करते हैं। 7 1/2
 
Delicious hot and cold water is always available there. O dear! Many pious kings and pure hearted brahmarishis sit there happily and worship Yama, the son of the Sun. 7 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)