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mahabharat 2.8.37: वे सभी सुन्दर बाजूबंद, विचित्र हार और चमकते हुए कुण्डल धारण किए हुए हैं। वे अपने पवित्र मंगल कर्मों, वस्त्रों और आभूषणों से भी सुशोभित हैं।   |   mahabharat अध्याय 2.8: यमराजकी सभाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 8: यमराजकी सभाका वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.8.37 
चित्राङ्गदाश्चित्रमाल्या: सर्वे ज्वलितकुण्डला:।
सुकृतै: कर्मभि: पुण्यै: पारिबर्हैश्च भूषिता:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वे सभी सुन्दर बाजूबंद, विचित्र हार और चमकते हुए कुण्डल धारण किए हुए हैं। वे अपने पवित्र मंगल कर्मों, वस्त्रों और आभूषणों से भी सुशोभित हैं।
 
All of them wear wonderful armlets, strange necklaces and glittering earrings. They are also adorned with their holy auspicious deeds and clothes and ornaments. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)