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mahabharat 2.8.35-36: भरत! वह सभा उसके तेज से प्रकाशित और प्रकाशित रहती है। जो कठोर तप और महान व्रतों का पालन करते हैं, सत्यवादी, शान्त, तपस्वी और जो अपने पुण्य कर्मों से शुद्ध और पवित्र हो गए हैं, वे उस सभा में जाते हैं। उनके सभी शरीर तेज से प्रकाशित रहते हैं। सभी स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं॥ 35-36॥   |   mahabharat अध्याय 2.8: यमराजकी सभाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 8: यमराजकी सभाका वर्णन  »  श्लोक 35-36
 
 
श्लोक  2.8.35-36 
ज्वलन्ती भासमाना च तेजसा स्वेन भारत।
तामुग्रतपसो यान्ति सुव्रता: सत्यवादिन:॥ ३५॥
शान्ता: संन्यासिन: शुद्धा: पूता: पुण्येन कर्मणा।
सर्वे भास्वरदेहाश्च सर्वे च विरजोऽम्बरा:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
भरत! वह सभा उसके तेज से प्रकाशित और प्रकाशित रहती है। जो कठोर तप और महान व्रतों का पालन करते हैं, सत्यवादी, शान्त, तपस्वी और जो अपने पुण्य कर्मों से शुद्ध और पवित्र हो गए हैं, वे उस सभा में जाते हैं। उनके सभी शरीर तेज से प्रकाशित रहते हैं। सभी स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं॥ 35-36॥
 
Bharata! That assembly remains lit and radiant with its radiance. Those who perform rigorous penance and observe great vows, are truthful, calm, ascetics and those who have become pure and holy by their pious deeds, go to that assembly. All their bodies remain illuminated with radiance. All wear clean clothes.॥ 35-36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)