Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.8.3: इसका प्रकाश सूर्य के समान है। वह सभा, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर लेती है, चारों ओर से प्रकाशित होती है। न अधिक ठण्डी होती है, न अधिक गर्मी। इससे मन को अपार आनंद मिलता है। | mahabharat अध्याय 2.8: यमराजकी सभाका वर्णन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्कप्रकाशा भ्राजिष्णु: सर्वत: कामरूपिणी।
नातिशीता न चात्युष्णा मनसश्च प्रहर्षिणी॥ ३॥
अनुवाद
इसका प्रकाश सूर्य के समान है। वह सभा, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर लेती है, चारों ओर से प्रकाशित होती है। न अधिक ठण्डी होती है, न अधिक गर्मी। इससे मन को अपार आनंद मिलता है।
Its light is like the sun. That assembly, which takes any form as desired, is illuminated from all sides. It is neither too cold nor too hot. It gives immense joy to the mind.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥