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श्री महाभारत
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पर्व 2: सभा पर्व
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अध्याय 8: यमराजकी सभाका वर्णन
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श्लोक 1
श्लोक
2.8.1
नारद उवाच
कथयिष्ये सभां याम्यां युधिष्ठिर निबोध ताम्।
वैवस्वतस्य यां पार्थ विश्वकर्मा चकार ह॥ १॥
अनुवाद
नारदजी कहते हैं- कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर! अब मैं सूर्यपुत्र यमराज के दरबार का वर्णन करूँगा। उसका निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था॥1॥
Naradji says- Kunti's son Yudhishthira! Now I will describe the court of Yama, son of the Sun. It was also created by Vishwakarma.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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