Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.79.5: क्या कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर, जिन्होंने द्रौपदी की राजकुमारी कृष्ण को राजसभा में दाव पर लगा दिया था, इस जीवन में वीरता और पुरुषार्थ की आवश्यकता को नहीं समझते?॥5॥ | mahabharat अध्याय 2.79: कर्ण और दुर्योधनके वचन, भीमसेनकी प्रतिज्ञा, विदुरकी चेतावनी और द्रौपदीको धृतराष्ट्रसे वरप्राप्ति । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रयोजनं जन्मनि किं न मन्यते
पराक्रमं पौरुषं चैव पार्थ:।
पाञ्चाल्यस्य द्रुपदस्यात्मजामिमां
सभामध्ये यो व्यदेवीद् ग्लहेषु॥ ५॥
अनुवाद
क्या कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर, जिन्होंने द्रौपदी की राजकुमारी कृष्ण को राजसभा में दाव पर लगा दिया था, इस जीवन में वीरता और पुरुषार्थ की आवश्यकता को नहीं समझते?॥5॥
Does Yudhishthira, the son of Kunti, who gambled away Draupadi's princess Krishna at stake in the court, not understand the need for valour and effort in this life?॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥