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mahabharat 2.79.36: हे राजन! मेरे पति दासत्व के कारण महान विपत्ति में फँस गए थे। अब वे उससे पार हो गए हैं। इसके बाद वे स्वयं पुण्य कर्म करके कल्याण को प्राप्त होंगे॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 2.79: कर्ण और दुर्योधनके वचन, भीमसेनकी प्रतिज्ञा, विदुरकी चेतावनी और द्रौपदीको धृतराष्ट्रसे वरप्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 79: कर्ण और दुर्योधनके वचन, भीमसेनकी प्रतिज्ञा, विदुरकी चेतावनी और द्रौपदीको धृतराष्ट्रसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.79.36 
पापीयांस इमे भूत्वा संतीर्णा: पतयो मम।
वेत्स्यन्ति चैव भद्राणि राजन् पुण्येन कर्मणा॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मेरे पति दासत्व के कारण महान विपत्ति में फँस गए थे। अब वे उससे पार हो गए हैं। इसके बाद वे स्वयं पुण्य कर्म करके कल्याण को प्राप्त होंगे॥ 36॥
 
O King! My husband was trapped in a great calamity due to the nature of a slave. Now he has overcome it. After this, by performing pious deeds, he himself will attain welfare. ॥ 36॥
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि द्यूतपर्वणि द्रौपदीवरलाभे एकसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत द्यूतपर्वमें द्रौपदीवरलाभविषयक इकहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७१॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)