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mahabharat 2.79.35: राजेन्द्र! वैश्य को एक वर मांगने का अधिकार दिया गया है, क्षत्रिय की पत्नी को दो वर मांगने का अधिकार है, क्षत्रिय को तीन वर मांगने का अधिकार है और ब्राह्मण को सौ वर मांगने का अधिकार है।   |   mahabharat अध्याय 2.79: कर्ण और दुर्योधनके वचन, भीमसेनकी प्रतिज्ञा, विदुरकी चेतावनी और द्रौपदीको धृतराष्ट्रसे वरप्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 79: कर्ण और दुर्योधनके वचन, भीमसेनकी प्रतिज्ञा, विदुरकी चेतावनी और द्रौपदीको धृतराष्ट्रसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.79.35 
एकमाहुर्वैश्यवरं द्वौ तु क्षत्रस्त्रिया वरौ।
त्रयस्तु राज्ञो राजेन्द्र ब्राह्मणस्य शतं वरा:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! वैश्य को एक वर मांगने का अधिकार दिया गया है, क्षत्रिय की पत्नी को दो वर मांगने का अधिकार है, क्षत्रिय को तीन वर मांगने का अधिकार है और ब्राह्मण को सौ वर मांगने का अधिकार है।
 
Rajendra! A Vaishya has been given the right to ask for one boon, a Kshatriya's wife can ask for two boons, a Kshatriya has the right to ask for three boons and a Brahmin has the right to ask for a hundred boons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)