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mahabharat 2.79.34: द्रौपदी बोली- हे प्रभु! लोभ धर्म का नाश कर देता है, इसलिए अब मुझमें वर मांगने का उत्साह नहीं रहा। हे राजन! मुझे तीसरा वर मांगने का भी अधिकार नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 2.79: कर्ण और दुर्योधनके वचन, भीमसेनकी प्रतिज्ञा, विदुरकी चेतावनी और द्रौपदीको धृतराष्ट्रसे वरप्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 79: कर्ण और दुर्योधनके वचन, भीमसेनकी प्रतिज्ञा, विदुरकी चेतावनी और द्रौपदीको धृतराष्ट्रसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.79.34 
द्रौपद्युवाच
लोभो धर्मस्य नाशाय भगवन् नाहमुत्सहे।
अनर्हा वरमादातुं तृतीयं राजसत्तम॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी बोली- हे प्रभु! लोभ धर्म का नाश कर देता है, इसलिए अब मुझमें वर मांगने का उत्साह नहीं रहा। हे राजन! मुझे तीसरा वर मांगने का भी अधिकार नहीं है।
 
Draupadi said— O Lord! Greed destroys Dharma, therefore I no longer have the enthusiasm to ask for a boon. O King! I do not even have the right to ask for a third boon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)