Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.79.3: सुन्दरी! अब तुम्हें शीघ्र ही दूसरा पति चुन लेना चाहिए ताकि तुम्हें जुए के माध्यम से फिर किसी की दासी न बनना पड़े। तुम्हारे जैसी स्त्री का पति की इच्छानुसार आचरण करना निंदनीय नहीं है। दासता में स्त्री की मनमानी पहले से ही विदित होती है, इसलिए तुम्हें दासता का यह एहसास होना चाहिए। | mahabharat अध्याय 2.79: कर्ण और दुर्योधनके वचन, भीमसेनकी प्रतिज्ञा, विदुरकी चेतावनी और द्रौपदीको धृतराष्ट्रसे वरप्राप्ति । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुन्दरी! अब तुम्हें शीघ्र ही दूसरा पति चुन लेना चाहिए ताकि तुम्हें जुए के माध्यम से फिर किसी की दासी न बनना पड़े। तुम्हारे जैसी स्त्री का पति की इच्छानुसार आचरण करना निंदनीय नहीं है। दासता में स्त्री की मनमानी पहले से ही विदित होती है, इसलिए तुम्हें दासता का यह एहसास होना चाहिए।
Beautiful lady! Now you should choose another husband soon so that you do not have to become someone's slave again through gambling. It is not reprehensible for a woman like you to behave according to the wishes of the husband. The arbitrariness of a woman in slavery is already known, hence you should get this feeling of slavery.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥