श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 79: कर्ण और दुर्योधनके वचन, भीमसेनकी प्रतिज्ञा, विदुरकी चेतावनी और द्रौपदीको धृतराष्ट्रसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.79.25 
धृतराष्ट्र उवाच
हतोऽसि दुर्योधन मन्दबुद्धे
यस्त्वं सभायां कुरुपुङ्गवानाम्।
स्त्रियं समाभाषसि दुर्विनीत
विशेषतो द्रौपदीं धर्मपत्नीम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, "अरे मूर्ख दुर्योधन! तू जीवित होकर भी मरा हुआ है। तू दुष्ट है! तू अपने ही कुल की स्त्री को, विशेषकर पाण्डवों की पत्नी को श्रेष्ठ कुरुवंशियों की सभा में ले आया है और उससे पापपूर्ण बातें कर रहा है।"
 
Dhritarashtra said, "Oh foolish Duryodhan! You are already dead even though you were alive. You are ill-mannered! You have brought a woman of your own clan and especially the wife of the Pandavas to the assembly of the best Kuru clan and are talking to her in sinful ways." 25.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas