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mahabharat 2.79.23: वह भयंकर शब्द दार्शनिक विदुर और सुबलपुत्री गांधारी ने भी सुना। वह अशुभ शब्द भीष्म, द्रोण और गौतमवंशी विद्वान कृपाचार्य के कानों में भी पड़ा। तब वे सब ऊँचे स्वर में 'स्वस्ति', 'स्वस्ति' कहने लगे। 23॥   |   mahabharat अध्याय 2.79: कर्ण और दुर्योधनके वचन, भीमसेनकी प्रतिज्ञा, विदुरकी चेतावनी और द्रौपदीको धृतराष्ट्रसे वरप्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 79: कर्ण और दुर्योधनके वचन, भीमसेनकी प्रतिज्ञा, विदुरकी चेतावनी और द्रौपदीको धृतराष्ट्रसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.79.23 
तं वै शब्दं विदुरस्तत्त्ववेदी
शुश्राव घोरं सुबलात्मजा च।
भीष्मो द्रोणो गौतमश्चापि विद्वान्
स्वस्ति स्वस्तीत्यपि चैवाहुरुच्चै:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वह भयंकर शब्द दार्शनिक विदुर और सुबलपुत्री गांधारी ने भी सुना। वह अशुभ शब्द भीष्म, द्रोण और गौतमवंशी विद्वान कृपाचार्य के कानों में भी पड़ा। तब वे सब ऊँचे स्वर में 'स्वस्ति', 'स्वस्ति' कहने लगे। 23॥
 
Philosopher Vidur and Subalputri Gandhari also heard that terrible word. That inauspicious word was heard in the ears of Bhishma, Drona and Gautam dynasty scholar Kripacharya also. Then all of them started saying 'Swasti', 'Swasti' in a loud voice. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)