Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.79.19: (परन्तु जब वे पहले स्वयं हारकर जुआ खेलने का अधिकार भी खो चुके थे, तब उसका मूल्य ही क्या रहा?) मैं तो अनधिकारी के द्वारा जुआ खेले गए धन की हार-जीत को उसी प्रकार मानता हूँ, जैसे स्वप्न में कोई धन जीतता या हारता है। कौरवों! गांधारराज शकुनि के वचन सुनकर तुम लोगों को अपने धर्म से विचलित नहीं होना चाहिए॥ 19॥ | mahabharat अध्याय 2.79: कर्ण और दुर्योधनके वचन, भीमसेनकी प्रतिज्ञा, विदुरकी चेतावनी और द्रौपदीको धृतराष्ट्रसे वरप्राप्ति । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(परन्तु जब वे पहले स्वयं हारकर जुआ खेलने का अधिकार भी खो चुके थे, तब उसका मूल्य ही क्या रहा?) मैं तो अनधिकारी के द्वारा जुआ खेले गए धन की हार-जीत को उसी प्रकार मानता हूँ, जैसे स्वप्न में कोई धन जीतता या हारता है। कौरवों! गांधारराज शकुनि के वचन सुनकर तुम लोगों को अपने धर्म से विचलित नहीं होना चाहिए॥ 19॥
(But when they had first lost themselves and lost the right to gamble it, then what was its value?) I consider the win or loss of the money gambled by an unauthorized person to be the same as if someone wins or loses money in a dream. Kauravas! You people should not deviate from your Dharma after listening to the words of Gandhara King Shakuni.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥