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mahabharat 2.79.15: उस समय भीमसेन क्रोध से भर गए और उनके शरीर के रोम-रोम से अग्नि की चिंगारियाँ निकल रही थीं, जैसे जलते हुए वृक्ष के रोम-रोम से ज्वालाएँ निकलती हैं॥15॥   |   mahabharat अध्याय 2.79: कर्ण और दुर्योधनके वचन, भीमसेनकी प्रतिज्ञा, विदुरकी चेतावनी और द्रौपदीको धृतराष्ट्रसे वरप्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 79: कर्ण और दुर्योधनके वचन, भीमसेनकी प्रतिज्ञा, विदुरकी चेतावनी और द्रौपदीको धृतराष्ट्रसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.79.15 
क्रुद्धस्य तस्य सर्वेभ्य: स्रोतोभ्य: पावकर्चिष:।
वृक्षस्येव विनिश्चेरु: कोटरेभ्य: प्रदह्यत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उस समय भीमसेन क्रोध से भर गए और उनके शरीर के रोम-रोम से अग्नि की चिंगारियाँ निकल रही थीं, जैसे जलते हुए वृक्ष के रोम-रोम से ज्वालाएँ निकलती हैं॥15॥
 
At that time, Bhimasena was filled with rage and sparks of fire were coming out from every pore of his body, just like flames are seen coming out from the pores of a burning tree.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)