श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 79: कर्ण और दुर्योधनके वचन, भीमसेनकी प्रतिज्ञा, विदुरकी चेतावनी और द्रौपदीको धृतराष्ट्रसे वरप्राप्ति  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.79.14 
पितृभि: सह सालोक्यं मा स्म गच्छेद् वृकोदर:।
यद्येतमूरुं गदया न भिन्द्यां ते महाहवे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
‘दुर्योधन! यदि मैं इस महायुद्ध में अपनी गदा से तुम्हारी यह जाँघ न तोड़ दूँ, तो मैं भीमसेन अपने पूर्वजों के समान पुण्य लोकों को प्राप्त न कर सकूँगा।’ ॥14॥
 
'Duryodhan! If I do not break this thigh of yours with my mace in this great war, then I, Bhimasena, will not be able to attain the virtuous worlds like my ancestors.' ॥ 14॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas