Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.78.8: दुर्योधन के उन सुन्दर वचनों को सुनकर सभा में उपस्थित कौरव बहुत प्रसन्न हुए। अन्य सभी राजा भी बहुत प्रसन्न हुए और दुर्योधन का आदर करने लगे तथा उसे कौरवों में श्रेष्ठ और धर्मात्मा कहने लगे।   |   mahabharat अध्याय 2.78: दुर्योधनके छल-कपटयुक्त वचन और भीमसेनका रोषपूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 78: दुर्योधनके छल-कपटयुक्त वचन और भीमसेनका रोषपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.78.8 
श्रुत्वा तु वाक्यं सुमनोहरं त-
द्धर्षश्चासीत् कौरवाणां सभायाम्।
सर्वे चासन् पार्थिवा: प्रीतिमन्त:
कुरुश्रेष्ठं धार्मिकं पूजयन्त:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन के उन सुन्दर वचनों को सुनकर सभा में उपस्थित कौरव बहुत प्रसन्न हुए। अन्य सभी राजा भी बहुत प्रसन्न हुए और दुर्योधन का आदर करने लगे तथा उसे कौरवों में श्रेष्ठ और धर्मात्मा कहने लगे।
 
Hearing those beautiful words of Duryodhana, the Kauravas in the assembly were very happy. All the other kings too were very happy and started respecting Duryodhana calling him the best and most righteous among the Kauravas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)