श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 78: दुर्योधनके छल-कपटयुक्त वचन और भीमसेनका रोषपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.78.18 
वैशम्पायन उवाच
तमुवाच तदा भीष्मो द्रोणो विदुर एव च।
क्षम्यतामिदमित्येवं सर्वं सम्भाव्यते त्वयि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - हे राजन! तब भीष्म, द्रोण और विदुर ने भीमसेन को शांत करते हुए कहा - 'भीम! मुझे क्षमा कर दीजिए, आप कुछ भी कर सकते हैं।'॥18॥
 
Vaishmpayana says - O King! Then Bhishma, Drona and Vidura pacified Bhimasena and said - 'Bhima! Please forgive me, you can do anything.'॥ 18॥
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि द्यूतपर्वणि भीमवाक्ये सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत द्यूतपर्वमें भीमवाक्यविषयक सत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)