श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 78: दुर्योधनके छल-कपटयुक्त वचन और भीमसेनका रोषपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.78.17 
धर्मराजनिसृष्टस्तु सिंह: क्षुद्रमृगानिव।
धार्तराष्ट्रानिमान् पापान् निष्पिषेयं तलासिभि:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
यदि धर्मराज मुझे आज्ञा दें तो जैसे सिंह छोटे-छोटे हिरणों को पकड़ लेता है, उसी प्रकार मैं भी तलवार के स्थान पर अपने हाथों के तलवों से ही इन पापी धृतराष्ट्र पुत्रों को कुचल डालूँगा।
 
If Dharamraj gives me permission, then just like a lion catches small deer, in the same way I will crush these sinful sons of Dhritarashtra with the soles of my hands instead of using a sword.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)