श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 78: दुर्योधनके छल-कपटयुक्त वचन और भीमसेनका रोषपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.78.1 
वैशम्पायन उवाच
तथा तु दृष्ट्वा बहु तत्र देवीं
रोरूयमाणां कुररीमिवार्ताम्।
नोचुर्वच: साध्वथ वाप्यसाधु
महीक्षितो धार्तराष्ट्रस्य भीता:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - 'जनमेजय! महारानी द्रौपदी को व्यथित और कुररी के समान विलाप करती हुई देखकर भी सभा में बैठे हुए राजा दुर्योधन के भय से कुछ भी भला-बुरा नहीं कह सके।
 
Vaishmpayana says - 'Janamejaya! Even after seeing Queen Draupadi in distress and wailing like a Kurri, the kings seated in the assembly could not say anything good or bad due to fear of Duryodhan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)