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mahabharat 2.77.4: द्रौपदी बोली - हाँ! मैं स्वयंवर के दौरान दरबार में आई थी और उस समय रंगशाला में आए राजाओं ने मुझे देखा था। इसके अलावा आज से पहले मुझे और कहीं किसी ने नहीं देखा था। आज मुझे जबरदस्ती दरबार में लाया गया है।   |   mahabharat अध्याय 2.77: द्रौपदीका चेतावनीयुक्त विलाप एवं भीष्मका वचन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 77: द्रौपदीका चेतावनीयुक्त विलाप एवं भीष्मका वचन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.77.4 
द्रौपद्युवाच
स्वयंवरे यास्मि नृपैर्दृष्टा रङ्गे समागतै:।
न दृष्टपूर्वा चान्यत्र साहमद्य सभां गता॥ ४॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी बोली - हाँ! मैं स्वयंवर के दौरान दरबार में आई थी और उस समय रंगशाला में आए राजाओं ने मुझे देखा था। इसके अलावा आज से पहले मुझे और कहीं किसी ने नहीं देखा था। आज मुझे जबरदस्ती दरबार में लाया गया है।
 
Draupadi said - Yes! I had come to the court during the swayamvara and the kings who had come to the theatre at that time had seen me. Apart from that, no one had seen me anywhere else before today. I have been forcibly brought to the court today.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)