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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 77: द्रौपदीका चेतावनीयुक्त विलाप एवं भीष्मका वचन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.77.3 
वैशम्पायन उवाच
सा तेन च समाधूता दु:खेन च तपस्विनी।
पतिता विललापेदं सभायामतथोचिता॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं, 'जनमेजय! दु:शासन द्वारा बार-बार खींचे जाने के कारण तपस्वी द्रौपदी भूमि पर गिर पड़ी और भरी सभा में अत्यन्त पीड़ा से विलाप करने लगी। वह जिस दयनीय अवस्था में थी, उसके वह कदापि योग्य नहीं थी।'
 
Vaishampayana says, 'Janamejaya! Due to repeated pulling by Dushasan, the ascetic Draupadi fell on the ground and started wailing in the assembly in great pain. She was never worthy of the miserable condition in which she was found.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)