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mahabharat 2.77.18: कल्याणी! तुम जिनकी पत्नी हो, वे पाण्डव हमारे ही कुल में उत्पन्न हुए हैं और बड़े-बड़े संकट आने पर भी धर्म के मार्ग से विचलित नहीं होते॥18॥   |   mahabharat अध्याय 2.77: द्रौपदीका चेतावनीयुक्त विलाप एवं भीष्मका वचन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 77: द्रौपदीका चेतावनीयुक्त विलाप एवं भीष्मका वचन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.77.18 
कुलेषु जाता: कल्याणि व्यसनैराहता भृशम्।
धर्म्यान्मार्गान्न च्यवन्ते येषां नस्त्वं वधू: स्थिता॥ १८॥
 
 
अनुवाद
कल्याणी! तुम जिनकी पत्नी हो, वे पाण्डव हमारे ही कुल में उत्पन्न हुए हैं और बड़े-बड़े संकट आने पर भी धर्म के मार्ग से विचलित नहीं होते॥18॥
 
Kalyani! The Pandavas, whose wife you are, were born in our noble clan and do not deviate from the path of Dharma even when faced with the greatest of crises. ॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)