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mahabharat 2.77.12: हे कुरुवंशी क्षत्रियों! कुरुवंश को कलंकित करने वाला यह नीच दुःशासन मुझे महान दुःख दे रहा है। मैं इस दुःख को अधिक समय तक सहन नहीं कर पाऊँगा॥12॥   |   mahabharat अध्याय 2.77: द्रौपदीका चेतावनीयुक्त विलाप एवं भीष्मका वचन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 77: द्रौपदीका चेतावनीयुक्त विलाप एवं भीष्मका वचन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.77.12 
अयं मां सुदृढं क्षुद्र: कौरवाणां यशोहर:।
क्लिश्नाति नाहं तत् सोढुं चिरं शक्ष्यामि कौरवा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुवंशी क्षत्रियों! कुरुवंश को कलंकित करने वाला यह नीच दुःशासन मुझे महान दुःख दे रहा है। मैं इस दुःख को अधिक समय तक सहन नहीं कर पाऊँगा॥12॥
 
O Kshatriyas of the Kuru clan! This vile Dushasan, who has brought disrepute to the Kuru clan, is causing me great pain. I will not be able to bear this pain for long.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)