श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 77: द्रौपदीका चेतावनीयुक्त विलाप एवं भीष्मका वचन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.77.10 
कथं हि भार्या पाण्डूनां पार्षतस्य स्वसा सती।
वासुदेवस्य च सखी पार्थिवानां सभामियाम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अन्यथा पाण्डवों की पत्नी, धृष्टद्युम्न की धर्मपरायण बहन और भगवान श्रीकृष्ण की सखी होने पर भी मैं राजाओं की इस सभा में कैसे लाई जा सकती थी?॥10॥
 
Otherwise how could I, being the wife of the Pandavas, the virtuous sister of Dhrishtadyumna and the friend of Lord Krishna, be brought to this assembly of kings?॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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