Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.76.d3: द्रौपदी ने मन ही मन कहा, 'मैंने महात्मा वशिष्ठ की बात अच्छी तरह समझ ली है कि जब कोई बड़ी विपत्ति आए तो भगवान हरि का स्मरण करना चाहिए। | mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(द्रौपद्युवाच
ज्ञातं मया वसिष्ठेन पुरा गीतं महात्मना।
महत्यापदि सम्प्राप्ते स्मर्तव्यो भगवान् हरि:॥
अनुवाद
द्रौपदी ने मन ही मन कहा, 'मैंने महात्मा वशिष्ठ की बात अच्छी तरह समझ ली है कि जब कोई बड़ी विपत्ति आए तो भगवान हरि का स्मरण करना चाहिए।
Draupadi said to herself, 'I have understood very well what Mahatma Vasishtha had said earlier, that in case of a great calamity, one should remember Lord Hari.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥