Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.76.d1-d2: यद्यपि रोग शरीर में बढ़ता है, फिर भी वह शरीर की शक्ति को ही नष्ट कर देता है। पशु तो घास ही चरते हैं, फिर भी उसे पैरों से कुचल देते हैं। इसी प्रकार, कुरुकुल में जन्म लेकर तुम अपने ही कुल को हानि पहुँचाना चाहते हो। विकर्ण! द्रोण, भीष्म, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, अत्यंत बुद्धिमान विदुर, धृतराष्ट्र और गांधारी—ये सब तुमसे अधिक बुद्धिमान हैं। | mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यद्यपि रोग शरीर में बढ़ता है, फिर भी वह शरीर की शक्ति को ही नष्ट कर देता है। पशु तो घास ही चरते हैं, फिर भी उसे पैरों से कुचल देते हैं। इसी प्रकार, कुरुकुल में जन्म लेकर तुम अपने ही कुल को हानि पहुँचाना चाहते हो। विकर्ण! द्रोण, भीष्म, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, अत्यंत बुद्धिमान विदुर, धृतराष्ट्र और गांधारी—ये सब तुमसे अधिक बुद्धिमान हैं।
Although disease grows in the body, it destroys the strength of the body itself. Animals only graze on grass, yet they crush it with their feet. Similarly, by being born in Kurukula, you want to harm your own family. Diagonal! Drona, Bhishma, Kripa, Ashwatthama, the very intelligent Vidur, Dhritarashtra and Gandhari—they are more intelligent than you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥