Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.76.75: जो साक्षी गाय या बैल के ढीले कानों के समान ढीला है और दोनों पक्षों के साथ सम्बन्ध रखते हुए गवाही नहीं देता, वह भी वरुण देवता के हजारों पाशों से बंधता है। 75. | mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
साक्षी वा विब्रुवन् साक्ष्यं गोकर्णशिथिलश्चरन्।
सहस्रं वारुणान् पाशानात्मनि प्रतिमुञ्चति॥ ७५॥
अनुवाद
जो साक्षी गाय या बैल के ढीले कानों के समान ढीला है और दोनों पक्षों के साथ सम्बन्ध रखते हुए गवाही नहीं देता, वह भी वरुण देवता के हजारों पाशों से बंधता है। 75.
A witness who is as loose as the loose ears of a cow or an ox and does not testify while maintaining relations with both the parties, also binds himself with thousands of nooses of the god Varuna. 75.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥