विदुर उवाच
द्रौपदी प्रश्नमुक्त्वैवं रोरवीति ह्यनाथवत्।
न च विब्रूत तं प्रश्नं सभ्या धर्मोऽत्र पीडॺते॥ ५९॥
अनुवाद
विदुर जी बोले - हे इस सभा में उपस्थित राजाओं! द्रुपद की पुत्री कृष्णा यहाँ अपना प्रश्न प्रस्तुत करके अनाथ की भाँति रो रही है; किन्तु आप लोग इस पर चर्चा नहीं कर रहे हैं, इसलिए यहाँ धर्म की हानि हो रही है।
Vidur ji said - O kings present in this assembly! Drupada's daughter Krishna is crying like an orphan after presenting her question here; but you people are not discussing it, hence religion is being harmed here.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)