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mahabharat 2.76.57: कौरव द्रौपदी के प्रश्नका स्पष्ट उत्तर नहीं दे रहे थे, इसलिए वहाँ बैठे हुए लोग राजा धृतराष्ट्रकी निन्दा करने लगे और उन्हें कोसने लगे ॥57॥   |   mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  2.76.57 
न विब्रुवन्ति कौरव्या: प्रश्नमेतमिति स्म ह।
स जन: क्रोशति स्मात्र धृतराष्ट्रं विगर्हयन्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
कौरव द्रौपदी के प्रश्नका स्पष्ट उत्तर नहीं दे रहे थे, इसलिए वहाँ बैठे हुए लोग राजा धृतराष्ट्रकी निन्दा करने लगे और उन्हें कोसने लगे ॥57॥
 
The Kauravas were not giving a clear explanation to Draupadi's question, so the people sitting there started criticizing King Dhritarashtra and cursing him. ॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)