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mahabharat 2.76.51: भीमसेन बोले- हे भिन्न-भिन्न देशों में रहने वाले क्षत्रियों! कृपया मेरी बात पर ध्यान दो। आज से पहले न तो किसी ने ऐसी बात कही है और न ही आगे कोई कहेगा।   |   mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.76.51 
भीम उवाच
इदं मे वाक्यमादध्वं क्षत्रिया लोकवासिन:।
नोक्तपूर्वं नरैरन्यैर्न चान्यो यद् वदिष्यति॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले- हे भिन्न-भिन्न देशों में रहने वाले क्षत्रियों! कृपया मेरी बात पर ध्यान दो। आज से पहले न तो किसी ने ऐसी बात कही है और न ही आगे कोई कहेगा।
 
Bhimasena said- O Kshatriyas living in different countries! Please pay attention to what I am saying. No one has said such a thing before today nor will anyone say it again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)