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mahabharat 2.76.41h: वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! जब द्रौपदी के वस्त्र खींचे जा रहे थे, तब उसने भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया।   |   mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 41h
 
 
श्लोक  2.76.41h 
वैशम्पायन उवाच
आकृष्यमाणे वसने द्रौपद्याश्चिन्तितो हरि:।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! जब द्रौपदी के वस्त्र खींचे जा रहे थे, तब उसने भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया।
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! When her clothes were being pulled, Draupadi remembered Lord Krishna. 40 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)